कृष्ण गायत्री मन्त्र :
ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्।
उक्त वर्णित समस्त मन्त्र अभीष्ट फलदायक हैं। इन मन्त्रों को दैनिक पूजन में अथवा निश्चित संख्या में अथवा संकल्पबद्ध अनुष्ठान के रूप् मे जप कर अभीष्ट लाभ प्राप्त किया जा सकता है। आस्था प्रत्येक स्थिति में आवश्यक है।
- 16 कलाऐं16 कलाओंराम 12 कलाओं के ज्ञाता थे तो भगवान श्रीकृष्ण सभी 16 कलाओं के ज्ञाता … Continue reading 16 कलाऐं
- कृष्ण सम्मोहन बाण साधनाSammohan Baan Mantra Sadhana महा भारत में जब पांडव अज्ञात वास बनवास काट रहे थे … Continue reading कृष्ण सम्मोहन बाण साधना
- सम्मोहन मंत्र साधनासम्मोहन साधना से आप किसी को भी अपने वश में कर सकते है सम्मोहन मतलब … Continue reading सम्मोहन मंत्र साधना
- श्री कृष्ण चालीसापावन और पवित्र संपूर्ण श्री कृष्ण चालीसा बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम। … Continue reading श्री कृष्ण चालीसा
- कृष्ण मंत्र साधनाकृष्णा मंत्र साधना सर्वप्रथम मंत्र सिद्ध यंत्र व माला लेकर साधना प्रारंभ करें. शुभ मुहूर्त … Continue reading कृष्ण मंत्र साधना
- कृष्ण गायत्री मंत्रकृष्ण गायत्री मन्त्र : ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्। उक्त वर्णित समस्त … Continue reading कृष्ण गायत्री मंत्र
- कृष्ण कवचकृष्ण ब्रह्माण्ड कवच ।। ब्रह्मोवाच ।। राधाकान्त महाभाग ! कवचं यत् प्रकाशितं । ब्रह्माण्ड-पावनं नाम, … Continue reading कृष्ण कवच
- कृष्ण हवन यज्ञ
- Krishna / Radha Artiकृष्णजी की आरती आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की। गले में बैजन्तीमाला बजावैं … Continue reading Krishna / Radha Arti
- कृष्ण
- Krishna Radha TantraKrishna Radha Mantra






