कृष्णा मंत्र साधना
सर्वप्रथम मंत्र सिद्ध यंत्र व माला लेकर साधना प्रारंभ करें.
शुभ मुहूर्त में नहा धो कर यंत्र को साफ प्लेट में स्थापित करें.
यंत्र की पूजा कर के मंत्र जाप आरम्भ करें
कृष्ण मंत्र तंत्र साधनाइस मंत्र के द्वारा भगवान श्री कृष्ण का यंत्र पर आवाहन करना चाहिए
-ॐ सहस्त्र शीर्षाः पुरुषः सहस्त्राक्षः सहस्त्र-पातस-भूमिग्वं सव्वेत-सत्पुत्वायतिष्ठ दर्शागुलाम् |
आगच्छ श्री कृष्ण देवः स्थाने-चात्र सिथरो भव ||
भगवान श्री कृष्ण की पूजा के दौरान इस मंत्र को पढ़ते हुए उन्हें नारियल फल समर्पण करना चाहिए-
इदं फ़लं मया देव स्थापित पुर-तस्तव |
तेन मे सफ़लानत्ति भरवेजन्मनि जन्मनि ||
इस मंत्र को पढ़ते हुए भगवान श्री कृष्ण यंत्र को पान-बीड़ा समर्पण करना चाहिए-
ॐ पूंगीफ़लं महादिव्यं नागवल्ली दलैर्युतम् |
एला-चूर्णादि संयुक्तं ताम्बुलं प्रतिगृहयन्ताम् ||
इस मंत्र को पढ़ते हुए बाल गोपाल भगवान श्री कृष्ण को चन्दन अर्पण करना चाहिए-
ॐ श्रीखण्ड-चन्दनं दिव्यं गंधाढ़्यं सुमनोहरम् |
विलेपन श्री कृष्ण चन्दनं प्रतिगृहयन्ताम् ||
श्री कृष्ण की पूजा करते समय इस मंत्र को पढ़ते हुए उन्हें सुगन्धित धूप अर्पण करना चाहिए-
वनस्पति रसोद भूतो गन्धाढ़्यो गन्ध उत्तमः |
आघ्रेयः सर्व देवानां धूपोढ़्यं प्रतिगृहयन्ताम् ||
इस मंत्र के द्वारा नंदलाल भगवान श्री कृष्ण यंत्र को यज्ञोपवीत समर्पण करना चाहिए-
नव-भिस्तन्तु-भिर्यक्तं त्रिगुणं देवता मयम् |
उपवीतं मया दत्तं गृहाण परमेश्वरः ||
भगवान देवकी नंदन की पूजा के दौरान इस मंत्र को पढ़ते हुए श्री कृष्ण जी को वस्त्र समर्पण करना चाहिए-
शति-वातोष्ण-सन्त्राणं लज्जाया रक्षणं परम् |
देहा-लंकारणं वस्त्रमतः शान्ति प्रयच्छ में ||
श्री कृष्ण पूजा के दौरान इस मंत्र को पढ़ते हुए बाल गोपाल यंत्र को शहद स्नान करना चाहिए-
पुष्प रेणु समुद-भूतं सुस्वाद मधुरं मधु ||
तेज-पुष्टिकरं दिव्यं स्नानार्थं प्रतिगृहयन्ताम् ||
भगवान श्री कृष्ण की पूजा करते समय इस मंत्र के द्वारा उन्हें अर्घ्य समर्पण करना चाहिए-
ॐ पालनकर्ता नमस्ते-स्तु गृहाण करूणाकरः ||
अर्घ्य च फ़लं संयुक्तं गन्धमाल्या-क्षतैयुतम् ||
भगवान श्री कृष्ण के पूजा के दौरान इस मंत्र को पढ़ते हुए उन्हें आसन समर्पण करना चाहिए-
ॐ विचित्र रत्न-खचितं दिव्या-स्तरण-सन्युक्तम् |
स्वर्ण-सिन्हासन चारू गृहिश्व भगवन् कृष्ण पूजितः ||
सप्तदशाक्षर श्रीकृष्णमहामंत्र :
‘ऊ श्रीं नमः श्रीकृष्णाय परिपूर्णतमाय स्वाहा’
यह श्रीकृष्ण का सप्तदशाक्षर महामंत्र है।
इस मंत्र का पांच या सवा लाख जाप करने से यह मंत्र सिद्ध हो जाता है।
जप के समय हवन का दशांश अभिषेक का दशांश तर्पण तथा तर्पण का दशांश मार्जन करने का विधान शास्त्रों में वर्णित है।
जिस व्यक्ति को यह मंत्र सिद्ध हो जाता है उसे सबकुछ प्राप्त हो जाता है।भगवान् विष्णु का
द्वादश अक्षर मन्त्र :
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
यह भगवान् विष्णु का महामन्त्र है।
इस मन्त्र को विष्णु भगवान के द्वादश अक्षर मन्त्र नाम से ख्याति प्राप्त है। इस मन्त्र की जप साधना के प्रभाव का वर्णन यहां संभव नहीं है। इस मन्त्र की सिद्धि प्राप्ति के पश्चात साधक के लिए कुछ भी असाध्य नहीं रह जाता। इसका मन्त्र का जप करने के लिए कोई निषेध अथवा प्रतिबंधित नियम नहीं हैं।
स्त्री व पुरुष, ब्राह्मण अथवा शूद्र कोई भी, कभी भी, रास्ता चलते भी, इसका जप कर सकता है।
यह मन्त्र त्रिकाल में सत्य और फलदायी है।
मन्त्र निम्न प्रकार हैं :
♦ ॐ कृः।
♦ ॐ कृष्ण।
♦ ॐ क्लीं कृष्ण।
♦ ॐ गोपाल स्वाहा।
♦ ॐ क्लीं कृष्णाय।
♦ ॐ कृष्णाय नमः।
♦ ॐ क्लीं कृष्णाय क्लीं।
♦ ॐ कृष्णाय गोविन्दाय।
♦ ॐ क्लीं कृष्णाय नमः।
♦ ॐ बालवपुषे कृष्णाय स्वाहा।
♦ ॐ श्रीं ह्नीं क्लीं कृष्णाय।
♦ ॐ श्री कृष्णाय परब्रह्मणे नमः।
♦ ॐ दधिभक्षणाय स्वाहा।
♦ ॐ क्लीं ग्लौं श्यामलांगाय
♦ ॐ बाल वपुषे क्लीं कृष्णाय स्वाहा।
♦ ॐ ह्नीं ह्नीं श्रीं श्रीं लक्ष्मी वासुदेवाय नमः।
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