सम्मोहन साधना से आप किसी को भी अपने वश में कर सकते है
सम्मोहन मतलब मोहित करना.
1. आपका मस्तिष्क शांत और शून्य होना चाहिए
2. आप लंबे समय तक एक पाइंट, विचार पर एकाग्र हो सके
3. आप खुद को सकारात्मक बनाये रख सके।
तीसरा बिंदु सबसे महत्वपूर्ण है क्यों की अक्सर ऐसा होता है की शुरू के अभ्यास में ही हम कुछ देर के अभ्यास से थकान हो सकती है ।
श्री कृष्ण : सम्मोहन साधना में सबसे अधिक पारंगत अगर कोई है तो वो है श्री कृष्ण। माना जाता है की 65 कलाओ में वे महारत हासिल कर चुके थे और मोहिनी, माया जाल की विद्या उनमे ही एक थी। श्री कृष्ण सिर्फ बांसुरी की धुन मात्र से सबको मोहित कर लेते थे, यहाँ तक की प्रकृति को भी।
मंत्र साधना के लिये सम्मोहन यंत्र व माला जरूर ले लें, यंत्र को गंगा जल से स्नान करवा कर किसी साफ प्लेट में स्थापित करें ,धूप दीप जला कर संक्षिप्त पूजा करें.
मंत्र का प्रयोग : सम्मोहन साधना का ये प्रयोग 2 दिन का है। सर्व देव पूजन के बाद श्री कृष्ण पूजन करें बाद अपने सामने सुपारी रखे। घी का दीपक प्रज्जवलीत करे और नैवेध के रूप में सफ़ेद लड्डू का भोग दे। इसके पश्चात् पंचोपचार करे। अब सफ़ेद स्फटिक, हकीक की माला का 2 दिन तक रोज 11 माला का जाप करे। अगर माला न मिले तो अंगुली पर भी कर सकते है। कम से आधा घंटे या एक घंटे माला जप में लगता है।
मंत्र निम्न है :
ॐ क्लीं क्लीं क्रीं क्रीं हुं हुं फट्
आसन सफ़ेद रंग का और जाप दिशा पूर्व हो इसका ध्यान रखे। इस दौरान आप अपान मुद्रा का प्रदर्शन हाथ से लगातार करते रहे तो अनुभव अच्छा रहता है। पढ़े : त्राटक में सफलता के लिए जरुरी है प्राण का प्रचुर मात्रा में होना
sammohan sadhna mantra
में खास क्या है ? इस मंत्र से आपके अंतर के विकार भी नष्ट होने लगते है। जब भी आपका मन निर्मल होगा आप आपने आराध्य को पाएंगे आपके आराध्य आपके मन में तब विचरण करते है जब आप सब लोभ, विकार से रहित हो जाते है। हमें चाहिए की हम अपने मन के विकार को दूर करते रहे ताकि अपने अंतर को निर्मल रख सके। कुछ शक्तिया कम समय में भी अपना असर दिखाने लगती है हमें इससे बचना चाहिए. अगर आप साधना में नए नए है तो सरल शाबर मंत्र साधना के कुछ मंत्र घर बैठे सिद्ध कर सकते है. सम्मोहन साधना में ध्यान रखे : हम जब भी किसी मंत्र का जाप करते है उसके उच्चारण की 3 अवस्थाये होती है। पहला जोर जोर से उच्चारण : इसमें हम खुद को बार बार एक ही मंत्र पर फोकस करते है ये उनके लिए प्रभावी है जिनका मन चंचल होता है और एक जगह टिकता नहीं है। दूसरा बुदबुदाना : इस अवस्था में आपको लगता है की आप कुछ उच्चारण कर रहे है पर क्या ये स्पस्ट नहीं रहता है दुसरो के लिए। इस अवस्था में हम खुद को एकाग्र रखते है। तीसरी अंतर में उच्चारण : ये अवस्था आपको लंबे ध्यान के बाद मिलती है। इस अवस्था में आप बाहरी तौर पर चाहे बैठे हो सो रहे हो या ध्यान कर रहे है मंत्र आपके अंतर में गुंजायमान रहता है। ये अवस्था आपके बाह्य वातावरण और अंतर के माहौल में प्रभाव के फर्क को दिखाती है। आप के अंतर में क्या चल रहा है आपके ऊपरी तौर पर स्पस्ट नहीं होता है और आप दुसरो के लिए रहस्यमयी हो जाते है। एक सम्मोहनकर्ता इस अवस्था में सबसे ज्यादा लाभ उठाता है। सम्मोहन साधना किस तरह काम करती है : आप सामान्य साधना में जिस तरह मन को साधते है फिर चाहे वो त्राटक हो या ध्यान इस साधना में भी आप संयम द्वारा मन की साधना करते है। जो इसे प्रभावशाली बनाती है। अगर आप खुद का संयम करने में सक्षम है तो आपमें ज्यादार शक्तिया वैसे ही जाग्रत होने लगती है। sammohan sadhna mantra
आपके मायाजाल पर काम करती है। सम्मोहन में किसी को जो भावना दी जाती है वो उसके खुद के विचारो को रोक देती है और आपके विचार उसे कल्पना बनाने में मदद करते है जो उसे हकीकत लगने लगती है। यानि आपका सामने वाले को आपकी मर्जी से सोचने देना, जो आप उसे दिखाना चाहते है वही दिखाना पढ़े
मूर्छा लाई जा सकती है। और ऐसे करतब करवाये जा सकते है जो सामान्य समझ के लिए सिर्फ चमत्कार है। यही साधनाओ की असली शक्ति है। अगर आप साधना करते है तो एक तरह से आप उसका संयम करते है, धारणा शक्ति को मजबूत करते है। किताबो में दी गई sammohan sadhna mantra भी प्रभावी होती है। फर्क सिर्फ इतना है की जी अनुपात में आपको साधना बताई जाती है उसके आसपास की साधना रह जाने पर प्रभाव भी आपको उसके अनुपात के मिलते है बिलकुल वैसे ही जैसे दवा की मात्रा देना।
सावधानिया :
किसी भी साधना की शुरुआत करने से पहले निम्न बातो पर ध्यान देना चाहिए जिससे आपको साधना के दौरान या बाद में गलत अनुभव, भय या नुकसान का सामना ना करना पड़े। आप जो साधना करना चाहते है उसे अनुभवी लोगो से पूछे और अपने मन की सभी शंकाओ का समाधान कर ले ताकि साधना में अड़चन ना आए। साधना के दौरान अपने आराध्य और गुरु का पूजन जरूर करना चाहिए। साधना के दौरान मन में साधना के प्रति प्रबल भावना होनी चाहिए। आपके विचार और भाव भी साधना के अनुसार होने चाहिये। जैसे सात्विक, तामसिक और जिस देवी देव की साधना कर रहे है उसका प्रभाव और आचरण कैसा है। किसी भी साधना का प्रयोग दिखावे के लिए नहीं करना चाहिए। दोस्तों आज ऐसे कई लोग है जो इन साधनाओ का खासतौर से सम्मोहन साधना का गलत फायदा उठाते है। जैसे वशीकरण अतः साधना के गलत प्रयोग की गलती कभी न करे। ये आपके आचरण और व्यव्हार के साथ मनोबल को नष्ट कर देती है। और आपकी आध्यात्मिक गति रुक सकती है।
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